Saturday, May 17, 2014

क्यों परेशान है तू इतना

कल वो आधी रात मेरे सपनो मे आई
पूूछा मझसे क्यों उदास है तू इतना
मैं तो खुश हूॆॆ अपनी नई दुनिया में
फिर क्यों परेशान है तू इतना ।।

तू ही तो चाहता था ऐसा
दूर हो जाए हम एक दूसरे से इतना
खुश रहूॆ किसी और के संग मैं हमेशा
फिर क्यों परेशान है तू इतना ।।

भूला दिया मैने तूझे हमेशा के लिए
तोड दिए सारे बंधन जो थे साये से
आज सारे नए रिश्ते है मेरे
फिर क्यों परेशान है तू इतना ।।

कोई जबाब नहीं मेरे पास तेरे सवालो का
अपनी उदासी इस गुमनामी का
आधी रात के मेरी इस तनहाई का जुदाई का
तेरी खुशियों के बावजूद अपनी इस परेशानी का ।।

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